सर्दियों के लिए बाबा केदारनाथ धाम के कपट विधि विधान से बंद हुए

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देवभूमि उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट सर्दियों के लिए बंद कर दिए गए हैं। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना के बाद गुरुवार (27 अक्टूबर) को सुबह साढ़े 8 बजे मंदिर के कपाट को भक्तों के लिए बंद कर दिया गया। इस दौरान इंडियन आर्मी  के 11 मराठा रेजीमेंट ने भी आध्यात्मिक संगीत बजाए।

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सूत्रों ने बताया कि ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग भगवान केदारनाथ के कपाट वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजा-अर्चना के बाद सुबह साढ़े आठ बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।

सेना की 11 मराठा रेजीमेंट के बैंड की भक्तिमय स्वर लहरियों के बीच कपाट बंद होने के मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय, तीर्थ पुरोहित और रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन के अलावा तीन हजार से अधिक श्रद्धालु वहां मौजूद थे। इस दौरान श्रद्धालुओं के ‘बम बम भोले’ और ‘जय केदार’ के उद्घोष से केदारनाथ धाम गुंजायमान रहा।

मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि तड़के तीन बजे केदारनाथ मंदिर को खोले जाने के बाद चार बजे से कपाट बंद करने की समाधि पूजन प्रक्रिया शुरू हुई।

इससे पूर्व बुधवार को केदारबाबा की पंचमुखी डोली को बुधवार को विशेष पूजा के बाद मंदिर में विसर्जित कर दिया गया और पूरा मंदिर पारंपरिक गीतों और मंत्रोच्चार के साथ-साथ भक्तों के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद बाबा केदार की पंचमुखी भोग मूर्तियों को उत्सव डोली में रखा गया। इसके बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर बाबा की डोली को मंदिर के हॉल में रखा गया।

चारधाम में शामिल एक अन्य धाम यमुनोत्री धाम के कपाट भी बृहस्पतिवार को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।

यमुनोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश उनियाल ने बताया कि उत्तरकाशी जिले में स्थित यमुनोत्री धाम के कपाट बंद करने की प्रक्रिया सुबह शुरू हो गई थी और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ परंपरानुसार विधिवत पूजा-अर्चना कर दोपहर 12:09 बजे सर्वसिद्धि योग अभिजीत मुहूर्त में मंदिर के द्वार बंद कर दिए गए।

उनियाल के मुताबिक, दो हजार से ज्यादा श्रद्धालु कपाट बंद होने की प्रक्रिया के साक्षी बने। उन्होंने बताया कि इस दौरान मंदिर प्रांगण में मौजूद श्रद्धालुओं ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर तांदी नृत्य भी किया।

उनियाल के अनुसार, मां यमुना की डोली को पारंपरिक वाद्य यंत्रों के मधुर संगीत के साथ यमुनोत्री धाम से ले जाकर उनके शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली गांव में स्थापित कर दिया गया। सर्दियों में अगले छह माह तक श्रद्धालु मां यमुना के दर्शन वहीं कर सकेंगे।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तीर्थयात्रियों का आभार जताया और कहा कि इस बार चारधाम यात्रा में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।