नीतीश कुमार का इस्तीफा सबके लिए चौकाने वाला था मगर शायद BJP के लिए नहीं. BJP बहुत अच्छे से जानती थी कि नीतीश कुमार की चाल ढाल में कब से और कितना बदलाव है. अगर सही मानिए तो BJP के लिए नीतीश कुमार थाली के बैंगन हो गये हैं वो कब कहां लुड़क जाए कोई नहीं जनता. नीतीश कुमार एक बार फिर BJP से दामन छुड़ा महागठबंधन बनाने चल दिए हैं.

लेकिन यहां सवाल ये आता है कि अगर BJP ये सब जानती थी तो उसने नीतीश कुमार को मानाने की कोशिश क्यों नहीं की. अगर ध्यान दिया जाए तो अब BJP को नीतीश कुमार पर भरोसा ही नहीं रहा नीतीश कुमार BJP के लिए धोखेबाज से कम नहीं हैं इस तरह से पाला बदलने की उनकी इस आदत ने उनकी विश्वसनीयता को खो दिया है. वो कब पलट जाएं कोई भरोसा नहीं.

जब कल नीतीश  ने इस्तीफा दिया उस समय किसी BJP नेता ने कुछ नहीं कहा न कोई ताना न कोई तमाशा लेकिन आज हर तरह से हमला किया जा रहा है. माना जाए तो BJP नीतीश कुमार के इस प्लान से अंजन न थी वो सब जानती थी कि नीतीश कुमार अब उनका हाथ झटकने वाले हैं. लेकिन किसी ने भी उनसे सिफारिश लगाने की कोशिश नहीं की. वैसे ये बात सामने आयी थी की अमितशाह ने कुछ अन्य नेताओं के साथ मिल कर नीतीश को समझाने की कोशिश की थी पर नीतीश कुमार अपनी वाली करते रहे.

यहां तक कि केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने तंज कसते हुए बोला कि भाजपा के पास 63 और JDU के पास 36 सीटें थी लेकिन इसके बाद भी भाजपा ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद दिया. इसके बावजूद अब फिर से उन्हें कोई और साथी चाहिए. नीतीश कुमार के इस व्यवहार से एक बात तो साफ़ है जब वो इतना करने के बाद BJP के नहीं हुए तो किसी और के क्या होंगे.

Also Read -   जानिए रोहिंग्याओं का इतिहास, आखिर कहां से बढ़ी भारत में इनकी संख्या और क्या है विवाद का कारण?

नीतीश कुमार को दर था कि BJP बिहार में भी महाराष्ट्र वाला खेल न खेल जाए और वो बिहार के उद्धव ठाकरे न बन जाए. BJP की बड़े भैय्या वाली इमेज ने नीतीश कुमार को अंदर से खौला रखा था और वो बस एक मौका चाहते थे अपनी चाल चलने का.