नए कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में मल्लिकार्जुन खड़गे के सामने पहाड़ जैसी चुनौतियां, बीजेपी को 2024 में रोकने के लिए बनानी होगी ठोस रणनीति

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पिछले कुछ सालों में पूर्वोत्तर सहित कुछ देश के तमाम राज्यों में कांग्रेस पार्टी का जनाधार काफी कमजोर हुआ है। केंद्रीय सत्ता के सबसे बड़े रास्ते यानी उत्तर प्रदेश में पार्टी की स्तिथि दयनीय है। आम आदमी पार्टी भी कुछ राज्यों में अब एक चुनौती के रूप में उभरने लगी है और कांग्रेस की जगह लेने का प्रयास कर रही है। मल्लिकार्जुन खड़गे को कांग्रेस पार्टी की जिम्मेदारी ऐसे समय में मिली है जब हिमाचल प्रदेश और गुजरात में विधानसभा चुनाव होने वाले है। साथ ही अगले साल कर्नाटक, मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों में भी चुनाव की बिगुल बजने वाली हैं। इसके बाद 2024 का आम चुनाव भी सिर पर होगा। ऐसे समय में उन पर कांग्रेस पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी है।

मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के नए अध्यक्ष चुन लिए गए हैं। उन्होंने चुनाव में कांग्रेस के लोकप्रिय नेता शशि थरूर को बड़े अंतर से हराया। 24 साल बाद कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष गांधी परिवार से बाहर का कोई व्यक्ति चुना गया है। खड़गे को चुनाव में 7,897 वोट मिले तो वहीं शशि थरूर को 1,072 वोट से ही संतोष करना पड़ा। मल्लिकार्जन खड़गे के सामने अध्यक्ष के रूप में चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है। खड़गे दलित समुदाय के दूसरे नेता हैं जो कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष बने हैं। इससे पहले 1968 में एस निजलिंगप्पा ने एक दलित नेता के रूप में कांग्रेस अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली थी।

कांग्रेस के पुनरुद्धार की चुनौती

मल्लिकार्जुन खड़गे राजनीति में पांच दशकों से अधिक का अनुभव रखते है। वह कांग्रेस की केंद्रीय सरकार में मंत्री, लोकसभा और राज्यसभा में कांग्रेस के नेता रहे हैं। साथ ही अतीत में उन्होंने कर्नाटक में कई विभागों को संभाला है। एक जुझारू और मुखर राजनेता खड़गे मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के कड़े आलोचक रहे हैं। मल्लिकार्जुन को हिंदी भाषी राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के साथ-साथ आंध्र प्रदेश और ओडिशा में कांग्रेस के पुनरुद्धार की रणनीति बनाने के लिए कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
बिखरा संगठन, आंतरिक गुटबाजी और संगठनात्मक विस्तार सबसे बड़ी चुनौती है।

कांग्रेस के सिमटते जनाधार के बीच मिली कमान

पिछले कुछ सालों में पूर्वोत्तर, दक्षिण सहित कई अन्य राज्यों में कांग्रेस पार्टी का जनाधार काफी सिमट गया है।आम आदमी पार्टी भी कई राज्यों में एक चुनौती के रूप में उभर कर कांग्रेस की जगह लेने की कोशिश कर रही है। मल्लिकार्जुन खड़गे को कांग्रेस पार्टी की कमान ऐसे वक्त पर मिली है जब हिमाचल प्रदेश और गुजरात में विधानसभा चुनाव होने ही वाले है। ऐसे में उन्हें कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने और जीत दिलाने की बड़ी जिम्मेदारी निभानी होगा. इसके अलावा उनके गृह राज्य कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान सहित कई अन्य राज्यों में 2024 में लोकसभा चुनाव अगले साल चुनाव होंगे।

कांग्रेस में टकराहट रोकने और एकता बनाए रखने की चुनौती

गुलाम नबी आजाद जैसे कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने हाल के महीनों और वर्षों में पार्टी का साथ छोड़ दिया है। इस स्थिति में कांग्रेस में एकजुटता बरकार रखने की एक बड़ी चुनौती खड़गे के सामने है। भारत जोड़ा यात्रा पर निकले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने स्पष्ट संकेत दिया कि खड़गे अपनी भूमिका खुद तय करेंगे। राहुल गांधी ने कहा, “मैं कांग्रेस अध्यक्ष की भूमिका पर टिप्पणी नहीं कर सकता, पार्टी अध्यक्ष तय करेंगे कि मेरी भूमिका क्या है और मुझे कहां तैनात किया जाएगा।” नेहरू-गांधी परिवार के वफादार खड़गे ने कहा है कि वह पार्टी की उदयपुर घोषणा को ईमानदारी से लागू करने की कोशिश करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी को रोकने के लिए बनानी होगी विशेष रणनीति

खड़गे के नेतृत्व में कांग्रेस को 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए विपक्षी एकता के लिए और प्रधानमंत्री मोदी की विजय यात्रा को रोकने के लिए रणनीति भी बनानी होगी। पिछले दो लोकसभा चुनावों के अनुभव को देखते हुए पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार पर भी फैसला करना होगा।

मल्लिकार्जुन खड़गे 24 बाद गांधी परिवार से बाहर के व्यक्ति के रूप में कांग्रेस पार्टी की जिम्मेदारी संभाल रहे है।
देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी की स्तिथि को सुधारने में वो कितना सफल होंगे और गांधी परिवार के साथ उनका तालमेल कैसा रहता है यह देखना दिलचस्प होगा।