ताज महल को आखिर किसने नहीं देखा , इसकी खूबसूरती लोगों को अपनी तरफ खींच ही लाती है | ताजमहल जितना खुबसूरत से उतना ही ज्यादा रहस्यों से भरा हुआ है | ताजमहल को लेकर लोगों ने कई अनुमान लगाए लेकिन इसका पूरा राज आज तक किसी को नहीं पता | दुनिया में केवल एक ऐसी चीज़ नहीं है जो रहस्यमयी है इसके अलावा भी काफी रोचक चीज़ें लोगों को हैरान कर देती हैं | रहस्यों को जानने की जिज्ञासा ही लोगों को और समझदार बनाती  है | अगर मनुष्य के मन से चीज़ों को जानने की इच्छा खत्म हो जाए तो उसका जीवन बेकार है |

ऐसा ही एक अनसुलझा रहस्य है ताजमहल का बनना , जी हाँ ! क्या आप जानते है कि ताजमहल को बिना सीमेंट के बनाया गया था ? आज इसी बात की जानकारी हम आपको देंगे | सुनने में कितना अजीब है न ये ? इतनी बड़ी इमारत बिना सीमेंट के बनायी गयी | सच में ये सबको हैरान कर देने वाला है | लेकिन यहा एक सवाल ये भी उठता है कि अगर ताजमहल के बनने में सीमेंट का इस्तेमाल नहीं हुआ तो आखिर इन पत्थरों को आपस में जोड़ा कैसा गया ?

लेकिन ताजमहल में सीमेंट का इस्तेमाल न करने की कोई इच्छा जैसा सवाल नहीं था | ताजमहल को बनने में 1631 से लेकर 1648 तक का समय लगा था, और जिस समय के बीच ताजमहल बन कर तैयार हुआ , उस समय तक सीमेंट का अविष्कार ही दुनिया में नहीं हुआ था | अब बिना सीमेंट ताजमहल बना कैसे ? हुआ कुछ यूं करता था कि उस समय की इमारतों को एक अलग और काफी खास पेस्ट का इस्तेमाल कर के बनवाया जाता था | इस पेस्ट को बनाने के लिए एक मिश्रण तैयार किया जाता था और इस मिश्रण को बनाने के लिए गुड़ , दही , जूट ,कंकर, बताशे, बेलगिरी का पानी और उड़द की दाल का इस्तेमाल किया जाता था | क्योंकि इमारतों को बनाते समय ये बहुत बड़ा सवाल होता था कि पत्थरों को आपस में चिपकाया कैसे जाए, और इन्ही पत्थरों को आपस में चिपकाने या जोड़ने के लिए इस खास किस्म के पेस्ट का इस्तेमाल होता था |

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सुनने में कितना अजीब है न , इन घरेलू रसोई की चीज़ों से इतने आलीशान और शानदार इमारत को बनाया जाता था | ये सच में सबको हैरान कर देने वाला है | सबसे बड़ी बात तो ये है कि इस मिश्रण में कितनी ताकत रही होगी जो आज तक ताजमहल टस से मस नहीं हुआ | उसकी सुन्दरता के साथ उसकी मजबूती भी यूं ही बरकरार है |

 

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