बीजेपी की संसदीय बोर्ड के हाल फिलहाल के बदलाव के बारे में राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई हैं. संसदीय बोर्ड के हालिया बदलाव में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को जगह नहीं मिली है, ऐसे में बीजेपी के अनुसार उसने इसे सामाजिक और क्षेत्र रूप से अधिक प्रतिनिधि बना दिया है और अब बीजेपी की निगाहें साल 2024 के लोकसभा चुनावों पर आ गई जिसके लिए फेरबदल की स्थिति लगातार बनी हुई है.

फेरबदल का सिलसिला जारी

बिहार, राजस्थान समेत आगे कई राज्यों में भी फेरबदल हो सकता है क्योंकि साल 2024 में लोकसभा का चुनाव है जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टक्कर देने के लिए अधिकतर राजनीतिक पार्टियों ने अपने उम्मीदवारों को उतारने की तैयारियां तेज कर दी है. अगले कुछ हफ्तों में बीजेपी ने महाराष्ट्र, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़  प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए और इसी के तहत उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों में फेरबदल भी कर दिया गया है.

विपक्षी ताकत हो रही तेज

आपको बता दें कि राजस्थान ही नहीं बल्कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के भविष्य को लेकर भी अटकलें तेज हैं जिसमें आलोचकों ने राज्य में उनकी नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठा दिया है जहां पर विपक्षी कांग्रेस एक मजबूत ताकत बनी हुई है और बीजेपी पार्टी के खिलाफ कदम उठाए जा रहे हैं. इसके अलावा उत्तर प्रदेश में बीजेपी का दमखम खास है और ऐसे में यूपी में चुनावी सफलता के लिए हमेशा पार्टी की संगठनात्मक मशीनरी और राज्यों की सरकारों के बीच मजबूत संबंध को प्राथमिकता दी गई है. लिहाजा, आगे आने वाले चुनाव में देखा जाएगा कि किस तरह से सारी विपक्षी पार्टी अपना कर्तव्य निभाकर साल 2024 के लोकसभा चुनाव में शामिल होती हैं.

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