बिहार की राजनीति के बाद अब देश के बड़े राजनेताओं का फोकस मिशन 2024 पर है. बता दें कि भारतीय जनता पार्टी ने आने वाले 2024 के चुनावों की तैयारियां भी शुरू कर दी है. ऐसे में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति की घोषणा कर दी है जिसमें एक बड़ा फेरबदल हुआ है.

पावरफुल चेहरों की छुट्टी

दरअसल, पार्टी के सबसे पावरफुल माने जाने वाले चेहरों की छुट्टी कर दी गई है और कुछ नए नेताओं की एंट्री हुई है. आपको बता दें कि बीजेपी के संसदीय बोर्ड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह, अमित शाह, बीएस येदियुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, के लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव, सत्यनारायण जटिया और बीएल संतोष को जगह मिली है. वहीं, बीजेपी केंद्रीय चुनाव समिति में संसदीय बोर्ड के सदस्यों के अलावा भूपेंद्र यादव, देवेंद्र फडणवीस, ओम माथुर, वनथी श्रीनिवास, शाहनवाज हुसैन, जोएल ओराम को जगह मिली है. इसके अलावा संसदीय बोर्ड से नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान की छुट्टी कर दी गई है.

सियासी संदेश देने की कोशिश

अब अटकलें इस बात की तेज हो गई है कि आखिर इन दोनों नामी चेहरों को जगह क्यों नहीं मिली? ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों ही समिति में ऐसे नेताओं को जगह दी गई है जिसके जरिए सियासी संदेश देने के साथ-साथ सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन भी बनाने की कोशिश की गई.

 

साल 2024 के लोकसभा चुनाव

वहीं, बीजेपी ने संसदीय बोर्ड और चुनाव समिति के जरिए अपने सियासी आधार को मजबूत करने का काम किया है. साल 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपने ओबीसी वोट बैंक को और भी मजबूत करने के लिए संसदीय बोर्ड में तीन नेताओं को जगह दी है.

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वोट बैंक साधने की कोशिश

अब बीजेपी ने अपनी कमेटियों में हर वोट बैंक को अपना निशाना बनाया है. बीजेपी ने हाई प्रोफाइल कमेटियों में दो यादव समुदाय के नेताओं को एंट्री दी है जिससे यह साफ है कि यूपी की सपा, बिहार की आरजेडी के कोर वोटबैंक अपने पाले में लाने की कोशिश है. ओबीसी में यादव आबादी को बीजेपी अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है.

साल 2024 का चुनाव

आपको बता दें कि दोनों ही कमेटियों से पार्टी ने अपने दो बड़े दिग्गज नेताओं को हटाया है. ऐसे में केंद्रीय चुनाव समिति में दो नेताओं की छुट्टी हो गई है. बता दें कि इस बार नए चेहरे के तौर पर नितिन गडकरी की जगह देवेंद्र फडणवीस को मिली है तो वहीं, थावरचंद गहलोत की जगह दलित चेहरे के तौर पर सत्यनारायण जटिया को मिली है, यदि बीजेपी आगे ऐसी ही चलती रही तो हो सकता है कि आने वाले साल 2024 के चुनाव में कोई बड़ा खेल हो.