बिहार में आए दिन नए हंगामे देखने को मिल ही रहें हैं. कभी सत्ता की कुर्सी पर बैठने के लिए हंगामे होते हैं तो कभी उस मंत्री का नाम सुर्खियों में आ जाता है जिनकी कोर्ट में पेशी होती है लेकिन वो मंत्री पद की शपथ ले रहे होते हैं. इन दिनों बिहार की सियासत इसलिए गर्माई हुई है क्योंकि बिहार विधानसभा स्पीकर विजय सिन्हा ने इस्तीफा देने से मना कर दिया है. अब सवाल उठ रहें हैं कि आखिर विजय सिन्हा इस्तीफा देने से मना क्यों कर रहें हैं?

पार्टी कर रही इस्तीफे की मांग

आपको बता दें कि बिहार में सत्ता परिवर्तन हुए करीब 12 से 13 दिन हो गए लेकिन अब तक विजय सिन्हा ने विधानसभा अध्यक्ष पद से इस्तीफा नहीं दिया है और सत्ताधारी जेडीयू, आरजेडी पार्टी लगातार इस्तीफे की मांग कर रही हैं लेकिन वो इस्तीफा देने को तैयार नहीं हैं. बता दें कि विधानसभा अध्यक्ष का कहना है कि जो उन्हें नोटिस दिया गया है वह नियमों के खिलाफ है.

विजय कुमार सिन्हा ने दी सफाई

मिली जानकारी के मुताबिक, विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि विगत दिनों में सत्ता को बचाए रखने के लिए जो कुछ भी हुआ उस पर इस समय कुछ भी कहना उचित नहीं होगा लेकिन इस दौरान विधायिका की प्रतिष्ठा पर जो प्रश्न खड़े किए गए हैं उस पर चुप रहना मेरे लिए अनुचित होगा. उन्होंने कहा कि विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में मेरे खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया मैंने अपने आपको विश्वास की कमी के रूप में नहीं देखा.

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अपने पद से नहीं देंगे इस्तीफा

आपको बता दें कि, विधानसभा अध्यक्ष का कहना है कि वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे. उन्होंने कहा कि, मेरे खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है लेकिन मैंने खुद पर विश्वास रखा. अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सचिवालय को दिया गया जिसमें नियमों की अनदेखी की गई है. बताते चलें कि, कानून के मुताबिक विधानसभा स्पीकर विजय कुमार सिन्हा अधिकतम 14 दिन स्पीकर की कुर्सी पर रह सकते हैं. वहीं, महागठबंधन सरकार को 15 दिन इंतजार करना पड़ेगा. ऐसे में 14 दिनों का समय 23 अगस्त को खत्म हो रहा है और 24 अगस्त को सत्र शुरू होगा. बता दें कि सत्र शुरू होने से 1 दिन पहले हुए विधानसभा स्पीकर ने बता दिया है कि वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे.