भारत एक ऐसा देश जिसकी अखंडता और संस्कृति की मिसालें पूरी दुनिया दिया करती है | कितनी अजीब बात है न ,कि जो भारतवासी  एक समय में अंग्रेजों को भारत से बहार खदेड़ने के लिए उनसे लड़ रहे थे झगड़ रहे थे , वही भारतवासी अंग्रेजों के जाने की घोषणा के बाद आपस में ही लड़ने लगे | लड़ाई की वजह थी भारत के दो टुकड़े ! जिस भारत को आजाद करने के लिए सबने साथ मिलकर जंग लड़ी ,उसी भारत को  आजाद कराने के बाद भारत के सीने पर विभाजन की वो कष्टदाय लकीरों को खींचा गया , जिसका दर्द आज भी है | इन लकीरों को खींचने का काम भले ही एक अंग्रेज का हो लेकिन ये इच्छा भारत के सपूतों की थी |

लेकिन आज हम आपको ये बताएंगे की आखिर वो अंग्रेज था कौन जिसने भारत के नक़्शे पर पैन से लाइनें खींच दी ? जिस अंग्रेज ने भारत के नक़्शे पर विभाजन रेखा खींची उसका नाम था ‘ सीरिल रेडक्लिफ ” | लेकिन क्या आपको पता है कि इससे पहले रेडक्लिफ भारत कभी नहीं आए थे | वो पेशे से एक वकील हुआ करते थे | भारत के बीच में उस रेखा को खींचने के लिए उन्हें जल्दबाजी में भारत बुलाया गया था | भारत को विभाजित करने के लिए उन्हें ये जिम्मेदारी तो दे दी थी ,लेकिन रेडक्लिफ को न तो भारत के बारे में कुछ पता था न ही भारत के नक़्शे के बारे में | एसे में खुद रेडक्लिफ के पसीने छुटे हुए थे |

लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर इस विभाजन रेखा की जिम्मेदारी एक ऐसे इन्सान को क्यों दी गयी जिसे यहां के बारे में कुछ पता ही नहीं था? हम आपको बताते है ऐसा क्यों किया गया |  अग्रेजों को बहुत अच्छे से पता था कि अगर उन्होंने यह काम किया तो आगे  भविष्य तक के लिए ये जिम्मा उनके सिर बंध जाएगा और वो इस विभाजन की बदनामी अपने सिर नहीं लेना चाहते थे | इसलिए उन्होंने एक ऐसे इन्सान को चुना जिसके ऊपर पक्षपात का आरोप कोई गलती से भी नहीं लगा पाता | इन्ही बातों को ध्यान में रखते हुए रेडक्लिफ को इसका जिम्मा सौंपा गया | क्योंकि न तो वो यहाँ पहले आए थे और न उन्हें हिंदू या मुस्लिम में से किसी के भी प्रति कोई भेदभाव रखने की समस्या होने वाली थी |

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ये लकीरें किसी कागजी मैप पर खींचनी जितनी आसान थी उतना ही मुश्किल था इसे जमीनी हकीकत पर उतारना | क्योंकि पूर्व पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान की सीमा रेखा को निर्धारित करना काफी कठिन था | ये कोई खेल नहीं था कि आज मैप पर लाइन खींची और कल उसे अपनी सहूलियत के हिसाब से मिटा दिया | क्योंकि ये रेखा कागज के टुकड़े पर  नहीं बल्कि भारत की जमीं पर खिच रही थी | रेडक्लिफ को पंजाब और बंगाल को भारत पाकिस्तान में बांटने की जिम्मेदारी दे दी गयी |

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एक बार एक वरिष्ट पत्रकार को इंटरव्यू देते हुए रेडक्लिफ ने कहा था कि , ‘बहुत कम वक्त दिया गया था इसलिए मेरे काम पर उंगली उठाया जाना ठीक नहीं है. अगर मुझे 2 से 3 साल इस काम के लिए दिए गए होते तो यकीनन यह बेहतर ढंग से हुआ होता.’| ये बोल थे रेडक्लिफ के, जिन्होंने 5 हफ्ते के अन्दर एक मुस्लिम और एक हिंदू वकील की मदद से भारत के विभाजन की रेखा खींची | सबसे हैरानी की बात तो ये थी की रेडक्लिफ को ये तक नहीं पता था कि पंजाब और बंगाल नक़्शे पर हैं कहाँ |

the wire.                                                                                 जब रेडक्लिफ ने बंटवारे के दौरान हुई हिंसा को देखा, उनका दिल पसीज गया और वो काफी दुखी हुए | इसी के चलते उन्होंने इस काम के बदले एक पैसा नहीं लिया ,उन्होंने इसके बदले कोई भी रकम लेने से इंकार कर दिया था | ये भी बताया जाता है कि कि इस विभाजन रेखा कोई तय करने के बाद वो अगले ही दिन भारत से निकल गए और फिर यहां कभी वापस नहीं आए | 14 ,15 अगस्त 1947 , ये वही रात थी जब भारत टूट गया| लाखों लोगों ने अपना परिवार खो दिया , घर खो दिए , लोगों को मारा गया उनके घर जला दिए गये , महिलाओं और बच्चियों के साथ वो बेरहमी दिखाई गयी जिसकी कल्पना करना भी नमुमकिन है

 

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